जगदलपुर - छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से बड़ी खबर सामने आई है। ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ के दौरान सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) गणेश उईके समेत 6 नक्सलियों को मार गिराया है। सभी नक्सलियों के शवों के साथ हथियार भी बरामद किए गए हैं।
मारे गए नक्सलियों में कुछ छत्तीसगढ़ से जुड़े नक्सली भी बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा नाम गणेश उईके का है, जिस पर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित था। वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले का रहने वाला था और साउथ सब जोनल कमेटी का इंचार्ज था। उसकी तलाश 7 राज्यों की पुलिस को लंबे समय से थी।
गणेश उईके नक्सली संगठन का पुराना और प्रशिक्षित कैडर माना जाता था। वह करीब 40 सालों से नक्सली संगठन से जुड़ा हुआ था और कई अहम जिम्मेदारियों पर काम कर चुका था। बताया जाता है कि वह RSU नेटवर्क के जरिए युवाओं को नक्सली संगठन से जोड़ने का काम करता था। नेहरू छात्रावास और कॉलेज परिसरों में घूमकर छात्रों से संपर्क बनाता था। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उसका सफर बाद में जंगल में हथियार उठाने तक पहुंचा।
कौन था गणेश उईके ?
69 वर्षीय गणेश उईके पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और ओडिशा में प्रतिबंधित संगठन के प्रमुख के रूप में काम कर रहा था। उसे पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चमरू और रूपा जैसे कई उपनामों से जाना जाता था। मूल रूप से वह तेलंगाना के नलगोंडा जिले का निवासी था।
मुठभेड़ का विवरण -
ओडिशा पुलिस और सुरक्षा बलों का यह संयुक्त ऑपरेशन कंधमाल जिले के चाकपाड़ थाना क्षेत्र के जंगलों में चलाया गया। ओडिशा के डीजीपी योगेश बहादुर खुराना ने बताया कि मुठभेड़ गुरुवार सुबह हुई, जिसमें उइके के साथ दो महिला नक्सली भी मारी गई हैं। डीजीपी के अनुसार, इस कार्रवाई से ओडिशा में नक्सलवाद की कमर टूट गई है।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ते कदम -
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिडमा और अब गणेश उईके जैसे शीर्ष कमांडरों के मारे जाने से नक्सलियों का नेतृत्व पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। यह ऑपरेशन न केवल ओडिशा बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी सक्रिय नक्सली गतिविधियों पर व्यापक असर डालेगा।

