रायपुर- लोक निर्माण विभाग छत्तीसगढ़ में कार्यरत लगभग 6,500 दैनिक-मासिक श्रमिकों के लिए लागू कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के क्रियान्वयन में हो रही गंभीर प्रशासनिक एवं विधिक त्रुटियों को लेकर श्रमिक संगठन द्वारा भारत सरकार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन एवं राज्य शासन के उच्चाधिकारियों को विस्तृत एवं तथ्यात्मक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया गया है।
संगठन ने अवगत कराया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में ₹75 करोड़ की राशि दैनिक-मासिक श्रमिकों के ईपीएफ हेतु आबंटित की गई थी, जो वर्तमान में भी लोक निर्माण विभाग के शीर्ष (018) में अप्रयुक्त पड़ी हुई है। यदि समय रहते इस राशि का विधिसम्मत उपयोग नहीं किया गया, तो आगामी बजट सत्र 2026-27 में यह राशि लैप्स होकर वित्त विभाग को प्रत्यावर्तित हो सकती है, जिससे श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा अधिकारों का हनन तथा शासन पर अनावश्यक अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
संगठन का यह स्पष्ट मत है कि अप्रैल 2015 से जनवरी 2026 तक कार्यरत समस्त 6,500 श्रमिकों का ईपीएफ बकाया इसी आबंटित राशि से पूर्णतः जमा किया जाना संभव है। इसके उपरांत भी प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) स्तर पर संचालित ईपीएफ कोड के माध्यम से राशि को केंद्रीकृत रूप से रोके जाने के कारण विभाग पर ब्याज एवं दंड की देयता लगातार बढ़ रही है, जिससे भारी राजस्व क्षति की स्थिति निर्मित हो रही है।
यह उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी इसी प्रकार की विभागीय लापरवाही के चलते कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा लोक निर्माण विभाग के खाते सीज कर ₹42 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में शासन को ₹120 करोड़ से अधिक की संभावित राजस्व क्षति का सामना करना पड़ सकता है।
संगठन ने यह भी आपत्ति दर्ज कराई है कि प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी दिनांक 10 मार्च 2025 के आदेश में केवल वर्ष 2017 तक कार्यरत श्रमिकों के ईपीएफ जमा करने के निर्देश दिए गए हैं, जो कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम, 1952 तथा न्यायालयों द्वारा स्थापित विधिक सिद्धांतों के प्रतिकूल है। अधिनियम के अनुसार, ईपीएफ लागू होने पर वह समस्त वर्तमान एवं भविष्य में कार्यरत श्रमिकों पर समान रूप से लागू होता है।
संगठन का स्पष्ट एवं सकारात्मक पक्ष -
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि यह पहल किसी व्यक्ति या विभाग के विरुद्ध नहीं, बल्कि श्रमिकों के वैधानिक सामाजिक सुरक्षा अधिकारों की रक्षा, शासन को होने वाली अनावश्यक राजस्व क्षति को रोकने, तथा प्रशासनिक प्रक्रिया को विधिसम्मत एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से की गई है।
संगठन यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि वह शासन एवं प्रशासन के साथ समन्वय में कार्य करते हुए समस्या के समाधान का पक्षधर है और सदैव ऐसे कदमों का समर्थन करेगा, जिससे श्रमिकों को समय पर ईपीएफ लाभ मिले, तथा राज्य शासन को अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
संगठन ने केंद्र एवं राज्य शासन से अपेक्षा की है कि इस विषय पर शीघ्र, संवेदनशील एवं समयबद्ध निर्णय लेकर आबंटित ₹75 करोड़ की राशि का संभागवार ईपीएफ कोड के माध्यम से उपयोग सुनिश्चित किया जाए, जिससे हजारों श्रमिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।


