गरियाबंद- गरियाबंद के उदंती– सीतानदी टाइगर रिज़र्व से वन्यजीव संरक्षण की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसमें तकनीक नहीं बल्कि इंसानी हिम्मत सबसे बड़ा हथियार बनी। शिकारियों के फंदे में फंसे एक गंभीर रूप से घायल तेंदुए को बचाने के लिए जब ड्रोन भी नाकाम हो गया, तब नोडल एंटी पोचिंग अधिकारी एवं एसडीओ ने अपनी जान जोखिम में डालकर उसे काबू में किया।
घटना 25 दिसंबर की है। तौरेंगा बफर क्षेत्र के ग्राम कोकोड़ी से दोपहर करीब दो बजे सूचना मिली कि एक तेंदुआ बस्ती के पास झाड़ियों में छिपा है। मौके पर पहुंची वन टीम को पता चला कि तेंदुए के गले में दो क्लच वायर के फंदे फंसे हैं, जो लगभग एक सप्ताह पुराने थे। गले में कसते फंदों से तेंदुआ गंभीर रूप से घायल था और सांस लेने में तकलीफ के कारण वह आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ आया था। इसी दौरान उसने एक कुत्ते का शिकार भी किया, जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया।
घनी झाड़ियों की वजह से ड्रोन से निगरानी संभव नहीं हो पाई। मेडिकल टीम भी 170 किलोमीटर दूर थी और अंधेरा नजदीक था। हालात की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ ने तुरंत रेस्क्यू का फैसला लिया। उन्होंने अकेले ही रस्सी का जाल तेंदुए पर फेंका। इस दौरान तेंदुए ने उन पर हमला भी किया, लेकिन सूझबूझ और साहस से वे उसे काबू में करने में सफल रहे। तेंदुए को सुरक्षित रूप से गजराज वाहन के पिंजरे में डालकर तौरेंगा रेस्ट हाउस लाया गया।
रात करीब आठ बजे जंगल सफारी से डॉक्टर जय किशोर जडिया, सहायक रमाकांत और टीम मौके पर पहुंची। तेंदुए को बेहोश कर उसके गले से दोनों फंदे निकाले गए, ड्रिप चढ़ाई गई और प्राथमिक उपचार किया गया। हालत में सुधार के बाद तेंदुए को तड़के चार बजे जंगल सफारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। पूरी तरह स्वस्थ होने पर उसे फिर से उदंती के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
वन विभाग का कहना है कि अवैध शिकार के कारण घायल वन्यप्राणी आबादी क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है। बीते सात दिनों में सांबर शिकार, मोर को कैद में रखने और जंगल में आग लगाने जैसे मामलों में 19 शिकारियों की गिरफ्तारी की गई है।
डीएफओ वरुण जैन ने फंदे लगाने वाले शिकारियों की सूचना देने या पकड़वाने पर 5,000 से 10,000 रुपये तक के गोपनीय इनाम की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि टाइगर रिज़र्व में केवल 35 प्रतिशत स्टाफ और सीमित संसाधनों के बावजूद एंटी पोचिंग टीम लगातार कार्रवाई कर रही है। पिछले तीन वर्षों में 750 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि मुक्त कराई गई है और 500 से अधिक शिकारी, तस्कर व अतिक्रमणकारी जेल भेजे गए हैं।
यह रेस्क्यू न सिर्फ एक तेंदुए की जान बचाने की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब इरादे मजबूत हों, तो जंगल में भी इंसानियत जीत जाती है।
