कार्यक्रम के दौरान यह पंक्तियां माहौल को और गहराई देती रहीं -
“जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मुकाम, वो फिर नहीं आते”.
शिक्षा की ऐतिहासिक विरासत का साक्षी विद्यालय-
उल्लेखनीय है कि आदिवासी विकासखंड नगरी में 70 और 80 के दशक के दौरान पूरे क्षेत्र में केवल श्रृंगीऋषि हाई स्कूल ही एकमात्र ऐसा विद्यालय था, जहां छात्र-छात्राएं ओल्ड मैट्रिक (कक्षा 11) तक शिक्षा प्राप्त करते थे। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें रायपुर जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के बावजूद इस विद्यालय ने शिक्षा की ऐसी नींव रखी, जिसने पूरे क्षेत्र को नई दिशा दी।
उच्च पदों तक पहुंचने वाले विद्यार्थी-
इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक छात्र-छात्राएं आगे चलकर पुलिस अधिकारी, प्राध्यापक, लेक्चरर, विधायक, मंत्री, कलेक्टर सहित विभिन्न प्रशासनिक और शासकीय पदों पर पहुंचे। कई लोग आज भी सरकारी सेवाओं में सक्रिय हैं, जबकि सैकड़ों पूर्व विद्यार्थी सेवा निवृत्त होकर समाज को अपने अनुभवों से मार्गदर्शन दे रहे हैं। कुछ छात्राएं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेवा केंद्र से जुड़कर मानव जीवन के कल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर राजयोग का अभ्यास एवं शिक्षण करा रही हैं। यह विद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र रहा, बल्कि नेतृत्व और संस्कारों की पाठशाला भी साबित हुआ।
दिवंगत साथियों को दी गई श्रद्धांजलि-
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह रहा, जब दिवंगत पूर्व छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान पूरा पंडाल शांति और सम्मान के भाव से भर गया, और कई आंखें नम हो उठीं।
संगवारी भावना ने जोड़ा दिलों को-
संगवारी कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, विद्यालय और सहपाठियों से जुड़ी स्मृतियां कभी पुरानी नहीं होतीं। यह आयोजन न केवल पुनर्मिलन का अवसर था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी—कि शिक्षा, मित्रता और संस्कार जीवनभर साथ चलते हैं, कार्यक्रम के समापन पर सभी ने ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की सहमति जताई, ताकि यह भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव भविष्य में भी बना रहे।
कार्यक्रम में मंच संचालन एंजिल स्कूल के संचालक श्री विमल मिश्रा और शिक्षिका श्रीमती सुमन गुप्ता के द्वारा किया गया।
.jpeg)

.jpeg)
